Sunday, 2 April 2023

श्रीराम नवमीं पर विशेष

 

मर्यादा पुरुषोत्तम ने,
जीना हमें सिखाया।
सच्चा जीवन बने त्याग से,
जी कर हमें दिखाया।।

महल त्याग वनवास लिया था,
पितु के वचन निभाए।
पैदल चल कर वन-वन घूमे,
कंद-मूल फल खाए।।

संतों का उद्धार किया था,
दुष्ट सभी थे मारे।
भिलनी के झूठे बेरों को,
सहज भाव स्वीकारे।।

वनवासी जनजाति वर्ग को,
हँस-हँस गले लगाया।
सबके हित में अपना हित है,
अपना धर्म बनाया।।

अपनाएँ आदर्श सभी हम,
स्वर्ग धरा पर आए।
रच कर *रामचरित-मानस* को,
तुलसी ने गुण गाए।।

यही सार है रामायण का,
पढ़, समझो सब भाई।
दृढ़ विश्वास रहे जो मन में,
मिलें हमें रघुराई।।

*** मुरारि पचलंगिया

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