Sunday, 23 July 2017

प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल

 
प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल,
सघन, सुवासित, अतिशय चंचल,
नेह निमंत्रण देते पल पल।
तन-मन हो उठता उच्छृंखल ।।
प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल...


मुख पर बिखरें ऐसे खुलकर,
भ्रमर-झुण्ड ज्यों नत फूलों पर,
करते गुंजन, होकर विह्वल।
झंकृत हो उठता अंतस्थल।।
प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल...


चोटी में बल खाते ऐसे,
सर्प-युगल क्रीड़ा-रत जैसे,
अंग अंग छूते हैं प्रतिपल।
मधुरस धारा बहती अविरल।।
प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल...


***** प्रताप सिंह

Sunday, 16 July 2017

सेना पर कुछ दोहे

सावन में फिर आ गई, काँवडियों की मौज।
घूम रहे हैं बन सभी, बम भोले की फौज।।1।।
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बानर सेना साथ ले, लंका पहुँचे राम।
किया आसुरी शक्ति का, प्रभु ने काम तमाम।।2।।
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आई भँवरों की चमू, करने पान पराग।
कली-कली से कर रही, देख व्यक्त अनुराग।।3।।
--
सेना अपने राष्ट्र की, देती नित बलिदान।
इसके कारण विश्व में, है भारत की शान।।4।।
--
दुर्गम दुर्ग पहाड़ का, देती सीना चीर।
सेना के बलिदान से, देश रहे बेपीर।।5।।


***** डाॅ. बिपिन पाण्डेय

Sunday, 9 July 2017

बड़ा मुश्किल - एक नवगीत


बड़ा मुश्किल
समय के साथ चल पाना
बड़ा मुश्किल


कभी ये शाह बनता है
बड़ा ये चोर है लेकिन
बदलता रंग बोल़ों के
मचाता शोर ये लेकिन


बड़ा मुश्किल
समय के साथ बतियाना
बड़ा मुश्किल


कभी ये बघनखे पहने
कभी महका गुलाबों सा
कभी पढ़ता अमृत मंतर
कभी बहका शराबों सा


बड़ा मुश्किल
समय के मंत्र पढ़ पाना
बड़ा मुश्किल


हँसा था साथ में अपने
सजी थी आरती आँगन
समय ने अब कहाँ पटका
अकेले इस सघन कानन


बड़ा मुश्किल
समय के साथ निभ पाना
बड़ा मुश्किल

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*** बृजनाथ श्रीवास्तव

Sunday, 2 July 2017

दुमदार दोहे


1.
उमड़ घुमड़ घिरने लगे, बदरा चारों ओर।
घनन घनन घन हो रहा, आसमान में शोर।।
मेघ पानी भर लाए।।
2.
मेघ मल्हारें गा रहे, कोयल का मधु गान।
हरित चूनरी में खिली, वसुधा की मुस्कान।।
झमाझम बारिश होती।।
3.
चोली चूनर चपल मन, सराबोर सब आज।
खोल दिए बरसात ने, यौवन के सब राज।।
काम ने वाण चढ़ाए।।
4.
सावन के झूले पड़े, शीतल मंद समीर।
मेघों की सौगात से, मिटी धरा की पीर।।
सभी के मन हर्षाए।।
5.
मेघों की बारात से, मन में उठे हिलोर।
वृंदगान करने लगे, दादुर मोर चकोर।।
हुआ मौसम सतरंगी।।


*****हरिओम श्रीवास्तव

Sunday, 25 June 2017

बचपन



जो किसी भी लालसा से मुक्त होगा
सच कहें तो बस वही उन्मुक्त होगा


हो नहीं ईर्ष्या न मन में द्वेष कोई
हो न अभिलाषा-जनित आवेश कोई


कुछ नहीं पाना अगर तो रोष कैसा
मन अगर संतुष्ट फिर आक्रोश कैसा


घूमते लट्टू इसी में व्यस्त बच्चे

भूल कर दुनिया हुए हैं मस्त बच्चे

नाचते लट्टू उधर बच्चे नचाते
लोभ के चक्कर बड़ों को हैं घुमाते


खेल बस प्रतिद्वंद्विता का खेलते हैं
लालसा में लिप्त जीवन झेलते हैं


एक कल्पित प्रगति का उन्माद मन में
जी रहे हैं बस लिए अवसाद मन में


लौट तो सकता नहीं बचपन दुबारा
पर बदल सकता है ये चिंतन हमारा


है मिला जितना उसे पर्याप्त मानें
सुख सदा संतुष्टि से ही प्राप्त जानें


अब न इच्छाएँ भले ही तुष्ट हों सब
है उचित फिर भी सभी संतुष्ट हों अब


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भूपेन्द्र सिंह "शून्य"

Sunday, 18 June 2017

मेघअश्रु बरसाता है



प्रकृति दोष जब धरती माँ के, आँचल आग लगाता है
एक वक्त की रोटी को भी, पेट तरस तब जाता है
कुल कुटुंब की भूख विवशता, होती धरती पुत्रों की

शुष्क नयन से तब सावन भी, मेघअश्रु बरसाता है


इठला कर बादल का पौरुष, दावानल है उगल रहा
कृषक पुत्र की खुशियाँ सारी, सत्ता का सुख निगल रहा
खलिहानों का सूखा अँधड़, मन मंतस तरसाता है
शुष्क नयन से तब सावन भी मेघअश्रु बरसाता है


जहाँ वेदना को ठुकराना, ही मंशा सरकारी है
तब प्राणों को आहुत करना, कृषकों की लाचारी है
जय किसान का घोष व्यर्थ तब, बोझ कलुष बनजाता हैं
शुष्क नयन से तब सावन भी, मेघअश्रु बरसाता है


***** अनुपम आलोक

Sunday, 11 June 2017

दो घनाक्षरी



जो भी हो मुझे पसंद, हो जाये वो रजामंद,
नाज़ जो उठाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
मानूं कभी उसकी मैं, वो भी मान जाए मेरी,
ताल जो मिलाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
हाँ में हाँ मिलाने वाले मिलेंगे कई मगर,
गलती बताये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
माँगे जो सभी की खैर, याद नहीं रक्खे बैर,
बस भूल जाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।।


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मोती ज्यों हो सीप सँग, बाती जैसे दीप सँग,
साथ मेरे आये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
डूबे मेरे दुख में जो, और मेरी खुशियों में,
खुशी जो मनाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
रास्ते हों फूल भरे चाहे मिलें शूल भरे,
साथ जो निभाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।
एक एक मिलकर ग्यारह बन जाते हैं,
हाथ जो बढ़ाये सदा, साथी ऐसा चाहिए।।


***** गुरचरन मेहता 'रजत'

प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल

  प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल, सघन, सुवासित, अतिशय चंचल, नेह निमंत्रण देते पल पल। तन-मन हो उठता उच्छृंखल ।। प्रिये तुम्हारे मोहक कुं...