Saturday, 31 May 2025

ओट धर्म की छिप जा प्यारे - एक गीत

 

हो जायेंगे वारे - न्यारे,
ओट धर्म की छिप जा प्यारे।

चूक गईं तरकीबें सारी,
गांधारी ने पट्टी बाँधी,
कुरुक्षेत्र में योद्धाओं को,
डसने लगी सर्पिणी आँधी।
धर्म मार्ग पर चलते -चलते,
पग - पग पर ही पांडव हारे।
हो जायेंगे..................।

विदुर- भीष्म- राधेय- सुयोधन,
चले शीश पर धर सिंहासन,
सत्य- असत्य, अधर्म -धर्म का,
सार कह गया बलि घर वामन।
अक्षौहिणी चमुओं का कौशल,
कितनी बार मिला हैं गारे।
हो जायेंगे.....................।

धर्म बोध आगम सम्मत पर,
साधु - सन्त भी मौन रहेंगे ,
योग क्षेम वैभव का रखकर,
मीठे स्वर में सूक्ति कहेंगे।
खामोशी की चीख सुनी तो,
समझो मौत आ गई द्वारे।
हो जायेंगे...................।
~~~~~~~~~~~
डॉ. मदन मोहन शर्मा
सवाई माधोपुर ,राज.
गारे = कीचड़।

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