कुण्डलिया - बरखा

  आयी रिमझिम बूँद है, लिये मधुर सौगात। नयनों के तट चूमती, कभी चूमती गात॥ कभी चूमती गात, तृषित मन प्यास बुझाती। यादों के पट खोल, प्री...