Sunday, 2 October 2016

हमारा वतन






ख़ुद में सारा जहान रखते हैं
दिल में हिन्दोस्तान रखते हैं
*
वक़्त आने पे ये दिखा देंगे
हम हथेली पे जान रखते हैं
*
हमको माटी मिली है भारत की
इसपे कितना गुमान रखते हैं
*
बुद्ध और युद्ध की विरासत को
देखिये हम समान रखते हैं
*
गंग-जमुनी के रँग में डूबी
कितनी मीठी ज़ुबान रखते हैं
*
यूँ तो संयम का नाम है भारत
पर गज़ब का उफान रखते हैं
*
हमको झुकना भी ख़ूब आता है
और सीना भी तान रखते हैं

*
हमने दुनिया को है दिखाया ये
बैरियों का भी मान रखते हैं
*


दीपक कुमार शुक्ला

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