Sunday, 29 November 2020
धरा हुई है लाल क्रोध से
Sunday, 22 November 2020
सूर्य पर दोहे
Sunday, 15 November 2020
दीपोत्सव
दीपोत्सव त्योहार है, मना रहे सब लोग।
लक्ष्मी पूजन कर सभी, खाते छप्पन भोग।।
लाखों दीपक जल रहे, देखो बनी कतार।
चमचम गलियाँ कर रही, कहीं नहीं अँधियार।।
आतिशबाजी हो रही, बच्चे आत्मविभोर।
दादाजी यों कह रहे, बंद करो यह शोर।।
बाजारों में रौनकें, सजे पड़े सब मॉल।
माता पूजन के लिए, सजा रही है थाल।।
नये वसन सब पहन कर, खुशी मनाते लोग।
बार-बार आता रहे, ऐसा सुखद सुयोग।।
जगमग झोंपड़ियाँ करें, श्रेष्ठ यही त्योहार।
धनपतियों का आज ही, बरसा इन पर प्यार।
आपस में सब बाँटते, भिन्न भिन्न उपहार।
सामाजिकता है बड़ी, बढ़ता इससे प्यार।।
*** मुरारि पचलंगिया ***
Sunday, 8 November 2020
नारी
Sunday, 1 November 2020
तीरथ करूँ हज़ार
छोड़ न पाऊँ मोह गठरिया,
तीरथ करूँ हज़ार।
रास न आये बोझिल बंधन,
व्यर्थ लगे शृंगार।
मन से मन का मेल न प्रीतम,
नहीं चातकी प्यास।
अगन लगाती चंद्र कौमुदी,
साँझ करे उपहास।
तुम्ही बताओ भगवन मेरे, भटक रही दिन रात।
कहाँ मिलोगे राम हमारे, पलक बिछाये द्वार।
छोड़ न पाऊँ मोह गठरिया,
तीरथ करूँ हज़ार।
हंस नहीं मैं मानस स्वामी,
नीर न क्षीर विवेक।
मूढ़ मना तृष्णा में फँस के,
कुंदन बने न नेक।
तपा रही अर्पण में काया, नीति रीति के काज।
नेहिल नइया पार लगाकर, दे दो जीवन सार।
छोड़ न पाऊँ मोह गठरिया,
तीरथ करूँ हज़ार।
मन उपवन में तुम्हें बसा लूँ,
राग नहीं अनुराग।
अर्थ न स्वारथ चाहत अपनी,
चूनर लगे न दाग।
प्रेम रंग में रच बस जाऊँ, और नहीं अवदान।
तृषित नयन को दे दो दर्शन, जाऊँ मैं बलिहार।
छोड़ न पाऊँ मोह गठरिया,
तीरथ करूँ हज़ार।
रास न आये बोझिल बंधन,
व्यर्थ लगे शृंगार।
*** डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी ***
जीवन है संगीत - एक गीत
शाश्वत गुंजित प्रणवाक्षर का, सतत् चल रहा गीत। उतर मौन में सुनो ध्यान से, जीवन है संगीत। चले समीरण सर-सर सर-सर, गाती है निर्भ्रांत। जल सरित...

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पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
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गहरी आँखों से काजल चुराने की बात न करो। दिलकश चेहरे से घूँघट उठाने की बात न करो।। सावन है बहुत दूर ऐ मेरे हमदम मेरे हमसफ़र। बिन म...