शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी से, अनुशासित परिवेश।
ज्ञान-धर्म पर वाद न कोई, जागरूक हो देश।
शिक्षा का उपयोग सही हो,
अभिलाषा यह मात्र।
जनमत की आवाज़ यही है,
भावी पीढ़ी छात्र।
चिंतनीय क्यों दशा आज है, मचा हुआ है क्लेश।
शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी से, अनुशासित परिवेश।
डिगे नहीं जो लक्ष्य-सत्य से,
पूर्ण करें तज स्वार्थ।
ध्यान साधना मार्ग अपरिमित,
ज्ञान सधे परमार्थ।
विष्णुगुप्त के मंत्र आज भी,बँधी शिखा हो केश।
शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी से, अनुशासित परिवेश।
कल की आशा छात्र हमारे,
व्यर्थ न उनका रोष।
प्रश्नपत्र के दीमक घाती,
किसका कितना दोष।
कहांँ जगाए भोर अर्चना, कहते सखा खगेश।
शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी से, अनुशासित परिवेश।
*** डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी

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