Sunday, 18 January 2026

आरम्भ

 

आरम्भ कोई शोर नहीं करता

वह अक्सर एक

गहरी चुप्पी में जन्म लेता है

जैसे रात के खत्म होने पर

अँधेरे को इत्तिला दिए बिना ही

सुबह की किरणें आ जाती हैं

आरम्भ बीते हुए का खंडन नहीं

बल्कि उसे सहलाती हुई

एक नई स्वीकृति है

मानों टूटे भरोसों की राख में

कहीं दबा हुआ

एक जीवित बीज!

आरम्भ

साहस से पहले का भय है

और भय के बाद की

सामान्य होती सांसे

यह वही क्षण है

जब मन

हार को स्वीकार कर

आगे बढ़ने का

पहला कदम रखता है!

आरम्भ

अंत का विरोध नहीं

उसका सबसे सटीक उत्तर है!


*** राजेश कुमार सिन्हा

 


Saturday, 10 January 2026

तब बनते हैं शंकर - गीत

 

निजी स्वार्थ के हेतु शक्ति सब, पाले मन के अंदर।
विष का प्याला पीना पड़ता, तब बनते हैं शंकर।।
करे समाहित उदिध सभी को, सरिता जो भी आई।
हृदय-सिंधु में कहाँ मनुज के, सागर सी गहराई।।
सदा विश्व कल्याण भावना, नहीं भरे अभ्यंतर।
निजी स्वार्थ के हेतु शक्ति सब, पाले मन के अंदर।।
ताकतवर निज कोष लुटाता, विश्व-धरा हरसाने।
मानव नित सामान जुटाता, लोगों को तड़पाने।।
किसी अहिल्या लाज लूटने, बनता नित्य पुरंदर।
निजी स्वार्थ के हेतु शक्ति सब, पाले मन के अंदर।।
तृषित धरा की प्यास बुझाने, वास्पित हुआ हमेशा।
सुख-दुख में समभाव रखे नित, देता यही सँदेशा।।
मनुज स्वार्थ की पूर्ति हेतु ही, रहता लगा निरंतर।।
निजी स्वार्थ के हेतु शक्ति सब, पाले मन के अंदर।।
*** चंद्र पाल सिंह 'चंद्र'

Sunday, 4 January 2026

नववर्ष पर दोहा सप्तक

 

खुशियों से भरपूर हो, नवल धवल हर भोर।
नव सुख की नव वर्ष में, बढ़ती जाए डोर।।1।।

मंगलमय नव वर्ष हो, हर पल हो खुशहाल।
प्रीत बढ़े नफरत मिटे, हर्ष भरा हो साल।।2।।

आगत का स्वागत करें, बढ़ें विगत को छोड़।
मची नये संकल्प की, नये साल में होड़।।3।।

मंथन बीते वर्ष पर, करना है बेकार।
नयी सोच से कीजिए, कल का नव शृंगार।।4।।

बिसरा बीती बात को, नूतन कर संकल्प।
श्रम से नव निर्माण का, कोई नहीं विकल्प।।5।।

नये साल की भोर का, सुखद सुहाना रूप।
फैले नूतन वर्ष में, हर पल सुख की धूप।।6।।

नया वर्ष सबका हरे, जीवन से संताप।
खुशहाली से ही सदा, होते बन्द प्रलाप।।7।।

*** सुशील सरना

नेह भरा ईश्वर का प्यार

  सृष्टि रचयिता परमेश्वर ही, जीवन पथ करते उजियार । जीवन दर्शन जो भी समझे, कुदरत का माने उपकार ।। माँ बापू ही ईश हमारे, नित उठ उनको करे प्रणा...