खुशियों से भरपूर हो, नवल धवल हर भोर।
नव सुख की नव वर्ष में, बढ़ती जाए डोर।।1।।
मंगलमय नव वर्ष हो, हर पल हो खुशहाल।
प्रीत बढ़े नफरत मिटे, हर्ष भरा हो साल।।2।।
आगत का स्वागत करें, बढ़ें विगत को छोड़।
मची नये संकल्प की, नये साल में होड़।।3।।
मंथन बीते वर्ष पर, करना है बेकार।
नयी सोच से कीजिए, कल का नव शृंगार।।4।।
बिसरा बीती बात को, नूतन कर संकल्प।
श्रम से नव निर्माण का, कोई नहीं विकल्प।।5।।
नये साल की भोर का, सुखद सुहाना रूप।
फैले नूतन वर्ष में, हर पल सुख की धूप।।6।।
नया वर्ष सबका हरे, जीवन से संताप।
खुशहाली से ही सदा, होते बन्द प्रलाप।।7।।
*** सुशील सरना

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