Sunday, 14 March 2021

सुन्दर हो संसार




सुन्दर हो संसार हमारा घर में सुख-दुख की लहरें हों।
चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥

धैर्य सजेगा जीवन में तो मंजुल-मन अनुराग बुनेगा।
मिल बाटेंगे प्यार परस्पर इन्द्रधनुष-मन फाग चुनेगा।
बहती जाती जीवन-नदिया अंतस-घट रसमय गहरे हों।
चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥

थोड़ी आशा छोटे सपने पंख लगा कर उड़ निकलें हम।
पूरी हों चाहें प्रयास हो पा कर खो कर मुड़ निकलें हम।
कर्म-धर्म की सुन्दर राहें चाल-चलन पर दृड़ पहरे हों।
चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥

मान बड़े-छोटों को सबको मिले बराबर यही रीति है।
नारी को बस नेह चाहिये प्रेम समर्पण सुभग नीति है।
पुरुष गर्व होते हैं घर के शिशु-किलके फुलवा-छहरे हों।
चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥

*** सुधा अहलूवालिया ***

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