Sunday, 28 June 2015

व्योम पटल पर कवि सम्मेलन


व्योम पटल पर कवि सम्मेलन
मधुर मिलन चेतन अवचेतन


धरा पहन के चूनर धानी
तिलक-माल करती अभिनंदन
सप्त सुरो ने ज्योति जलायी
सतरंगी मयूर की ता धिन 


देख क्षितिज का महिमा मंडन
दंग रह गये सारे कविगन
बूँद-बूँद पग पायल बाँधे
बारिस रानी छम-छम नर्तन


गोप खुशी से लोप हो गया
देख घटा की छटा विलक्षन
पारिश्रमिक की होड़ नही है
तुलसी तिलक करें रघुनंदन


*** गोप कुमार मिश्र ***

No comments:

Post a Comment

क्रोध/कोप पर दोहे

मानव मन के गाँव में , व्यथा बड़ी है एक । चिरंजीव हो क्रोध ने , खंडित किया विवेक ।। क्रोधाग्नि जब-जब जली , अंहकार के गाँव । नि...