उलझन कभी नहीं बतलाती, जीवन के प्रश्नों का हल।
शान्त हृदय से ही मिलते हैं, सुन्दर सुखद सुहाने पल।
बाधाओं से मुक्त नहीं हैं, अनजानी जीवन राहें।
जहाँ विपत्ति खड़ी रहती हैं, फैलाए अपनी बाहें।
नहीं दिखाई पड़ता हमको, इस नैराश्य सिन्धु का तल।
उलझन कभी नहीं बतलाती, जीवन के प्रश्नों का हल।
जब अशान्त हो अन्तर अपना, सुख का फूल नहीं खिलता।
उलझन के ताने-बाने का, कोई सिरा नहीं मिलता।
अवसादों का तमस् लिए कब, होगा मधुमय आगत कल।
उलझन कभी नहीं बतलाती, जीवन के प्रश्नों का हल।
नहीं आज में जीने देते, उलझन के ये चौराहे।
किंकर्तव्यविमूढ़ हुआ मन, जादू की लकड़ी चाहे।
किन्तु मिटेगी सारी उलझन पाकर आत्म शक्ति का बल।
उलझन कभी नहीं बतलाती, जीवन के प्रश्नों का हल।
*** सीमा गुप्ता 'असीम'

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