Sunday, 23 February 2025

शुभ-शुभ - एक गीत

 

शुभ-शुभ शीत ग्रीष्म बरसात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।

तेरा शुभ हो मेरा शुभ हो।
नहीं किसी का कभी अशुभ हो।
वैमनस्य कटुभाव रहे ना,
कहो वही जो रहे अचुभ हो।
शुभ-शुभ निकले मुख से बात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।

रहे कामना सदा सुमंगल।
बोल कभी ना रहें अनर्गल।
मान प्रभू की इच्छा सुख-दुख,
मिले सुधारस या मिले गरल।
स्वस्थ मांनस हो पावन गात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।

सुन्दर शुभकारी रहे सृष्टि।
रहे अपनी सकार की दृष्टि।
अधर मधुर मुस्कान सहेजें,
अमृत सी होती रहे वृष्टि।
शुभ-शुभ वृक्ष सुमन अरु पात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।

डॉ. राजकुमारी वर्मा

No comments:

Post a Comment

जीवन है संगीत - एक गीत

  शाश्वत गुंजित प्रणवाक्षर का, सतत् चल रहा गीत। उतर मौन में सुनो ध्यान से, जीवन है संगीत। चले समीरण सर-सर सर-सर, गाती है निर्भ्रांत। जल सरित...