तेरा शुभ हो मेरा शुभ हो।
नहीं किसी का कभी अशुभ हो।
वैमनस्य कटुभाव रहे ना,
कहो वही जो रहे अचुभ हो।
शुभ-शुभ निकले मुख से बात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।
रहे कामना सदा सुमंगल।
बोल कभी ना रहें अनर्गल।
मान प्रभू की इच्छा सुख-दुख,
मिले सुधारस या मिले गरल।
स्वस्थ मांनस हो पावन गात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।
सुन्दर शुभकारी रहे सृष्टि।
रहे अपनी सकार की दृष्टि।
अधर मधुर मुस्कान सहेजें,
अमृत सी होती रहे वृष्टि।
शुभ-शुभ वृक्ष सुमन अरु पात।
शुभ-शुभ प्रातः दिन अरु रात।
डॉ. राजकुमारी वर्मा
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