Sunday, 2 April 2017

नवरात्रि पर विशेष


1
उठो मातु आये दुखी भक्त द्वारे
मिले हर्ष उत्कर्ष ले आस सारे।।
अँधेरे घने हो डराने लगे हैं।
उजाले छले आज जाने लगे हैं।।
2
हुईं दानवी शक्तियाँ मातु भारी।
धरा भी दुखी हो तुम्हे माँ पुकारी।।
मिटाओ अहंकार हे कालिके माँ।
तुम्हीं हो सहारा तुम्हीं पालिके माँ।।
3
करो लेखनी पे कृपा शारदे माँ।
विराजो हिये कण्ठ झंकार दे माँ।।
तुम्हारी दया माँ जिसे भी मिली है।
बुझी ज्योति भी माँ उसी की जली है।।


***** राजेश प्रखर

No comments:

Post a Comment

प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल

  प्रिये तुम्हारे मोहक कुंतल, सघन, सुवासित, अतिशय चंचल, नेह निमंत्रण देते पल पल। तन-मन हो उठता उच्छृंखल ।। प्रिये तुम्हारे मोहक कुं...