Sunday, 7 September 2014

यक्ष प्रश्न

सत्यं शिवं सुन्दरम् - साहित्य सृजन मेखला 
के साहित्यिक मंच पर 
मज़मून 18 में चयनित 
सर्वश्रेष्ठ रचना


चेहरे की हँसी से किसी के,
दिल का हाल मत पूछो,
बादल क्यों बरसता रहा रात भर,

बिजलियों से जा के पूछो

आसमाँ छू सको तो,
शौक़ से चले आओ उड़ने,
पर मंज़िल कहाँ मिलेगी,
यह रास्तों से पूछो


घर के ज़ख्मों को,
छिपा लेते हैं जगमगाते फानूस,
इन दीवारों में क्या दफ़न है?

घर के झरोखों से पूछो

आँधियाँ कितनी बेरहम थी उन दिनों,
यह बात पंछियों से मत पूछो,

कौन सा परिंदा बेघर हुआ,
पेड़ की टूटी डालियों से पूछो


मटमैला-सा आलम है,
आसमानों में धुआँ-धुआँ क्यों है?
फूलों को खिला रहने दो बागवानों में,
तितलियाँ कहाँ खो गयीं,
यह पिछली सदी से पूछो

________

मंजुल भटनागर

No comments:

Post a Comment

रक्षा-बन्धन आया है

देखो कैसा पावन दिन यह, रोली-चन्दन लाया है आज बहन से मुझे मिलाने, रक्षा-बन्धन आया है  बाबूजी की प्यारी बिटिया, माँ की राज दुलारी थी...