Sunday, 11 December 2016

ताटंक छंद



कौन काल के गाल समाता, कौन ख़ुशी से जीता है,
किसके घर में कंगाली है, किसका महल सुभीता है?
इस पर मंथन बहुत जरूरी, किसका जीवन रीता है,
कब्जे में अमृत- घट किसके, कौन हलाहल पीता है?


*****राजकुमार धर द्विवेदी

No comments:

Post a Comment

नेह भरा ईश्वर का प्यार

  सृष्टि रचयिता परमेश्वर ही, जीवन पथ करते उजियार । जीवन दर्शन जो भी समझे, कुदरत का माने उपकार ।। माँ बापू ही ईश हमारे, नित उठ उनको करे प्रणा...