Sunday, 8 March 2015

होली गीत





 
रंगों से भीगी अरुणाई ख़ुशियों की बरसात हो गई।
रंग-रूप-रस सुभग सलोने गीतों की सौगात हो गई।
 
गालों का है रंग गुलाली,
मदमाती सी चाल मराली,
चूनर पट है भीगी धानी,
होठों पर लिपटाये लाली।
श्याम-सलोने मोहन के संग राधा ज्यों जलजात हो गई।
प्रीति-रीति की कुंज गली में हर्षाई सी प्रात हो गई।
 
ब्रज में धूम मचाये होरी,
नाचै महुआ नीम निबौरी,
रंग अबीर गुलाल उड़ावै,
मोहन के संग ब्रज की गोरी।
मोहन लिए गुलाल अबीरा राधा मोहक गात हो गई।
नैनों में छलकै मधुरामृत प्रीति परागत प्रात हो गई।
 
मोहन ने मारी पिचकारी,
भीग रही है राधा प्यारी,
ग्वाल बाल सब भंग पिए हैं,
गोपी इन्द्रधनुष सी क्यारी।
मन से मन के तार मिल गए ख़ुशियों की बारात हो गई।
मधुराक्षर में श्याम-सलोने भावों की सौगात हो गई।
 
------------- ●
विद्या प्रसाद त्रिवेदी ● ----------

No comments:

Post a Comment

दीवाली के दोहे

जब लौटे वनवास से, लखन सहित सियराम। दीपों से जगमग हुआ, नगर अयोध्या धाम।।1।। जलते दीपों ने दिया, यह पावन संदेश। ज्योतिपुञ्ज श्...