Saturday, 9 February 2013

एक ग़ज़ल


2 comments:

  1. Replies
    1. कामिल कुमार जी,
      बहुत-बहुत शुक्रिया आपका.

      सादर
      सपन

      Delete

थोथा चना बाजे घना

भ्रम जी हाँ भ्रम भ्रमित करता है मन के दौड़ते अहंकार को, अंतस के शापित संसार को। क्षितिज पर धुएं का अंबार अम्बर की नील पराकाष्ठा को...