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आशा की किरण - एक गीत
आशा एक किरण छोटी सी, मन को ख़ुशियों से भर जाती। चिर-सन्तप्त हृदय में नेहिल, अपनेपन का लेप लगाती। भग्न मनोरथ के मरुथल में, सरिता बनकर बहती क...
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पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
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जब उजड़ा फूलों का मेला। ओ पलाश! तू खिला अकेला।। शीतल मंद समीर चली तो , जल-थल क्या नभ भी बौराये , शाख़ों के श्रृंगों पर चंचल , कुसुम-...
waah bahut khubsurat ehsaason se saji ghazal...
ReplyDeleteआपका बहुत बहुत शुक्रिया सिया कुमार जी। आपके प्रेरक शब्दों ने मेरा हौसला बढ़ाया है.
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