Tuesday, 15 November 2011

नवयुवक एवं दायित्व


नवयुवकों के वृषभ कन्धों पर,
नवयुग का भार,
अत्यंत वृहद्,
ढोकर चलना है उनको,
नवीन परम्पराओं का भार असह्य।
विगत मौसमों में पिघलता जीवन,
पल-पल करवट बदलता जीवन,
प्रलय प्रवाह-सा बहता जीवन,
उदय नव-प्रसून का,
आभास नव-जीवन का,
गरजता मौसम बादल से,
छ्लकता मोती सीप से,
बदलता सावन नव-कलिकाओं से,
नई उमंग, नया सवेरा, विराम नया,
नई दृष्टि, नई आशा, जीवन नया,
नई उलझन, नये गलीचे, मकान नया,
तब,
दृष्टिकोण पुरातन क्यों ?
उठो, जागो, नवयुवको !
नवयुग का भार वहन करो,
किनारे नये,
किरण नई,
व्यक्तित्व नये ।

2 comments:

  1. Kya baat hai ! Vishwajit , aap mein to ek bada hi sanvedansheel kavi chhipa baitha hai... dhanyavad unko jinhone apko kavi banaya..

    Jahan tak hamari jankari hai ...Aap to aise na the.

    harendra

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