Sunday, 24 November 2024

नदी निकलती है - एक गीत

सूरज की गर्मी पाकर जब बर्फ़ पिघलती है,
गिरि की साँसों के सरगम से नदी निकलती है।

तोड़ शिलाओं के कोरों को निर्मल बनता है,
गदराई घाटी के मुख से झरना गिरता है,
अँजुरी में भर दूध तलैया रूप निरखती है,
पगडण्डी पर उछल मचलकर नदी निकलती है।

कंकर पत्थर रेत कणों से मीठा बतियाती,
फूलों पत्तों के दोनो में मधुरस भर जाती,
जंगल के ऑंगन में आकर खूब सँवरती है,
घाटों से कर ऑंख मिचौली नदी निकलती है।

गाँवों के अल्हड़ यौवन की मादक अठखेली,
नगरों के बासी बर्तन में पिघली गुड़ ढेली,
धूप छाँव के पुलिन जोड़ती छुवन उतरती है,
तब मन मौसम के गोमुख से नदी निकलती है।
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डॉ. मदन मोहन शर्मा
सवाई माधोपुर, राज. 

Sunday, 17 November 2024

गीत - ऐ पथिक

 

मंजिल पाने हेतु पथिक तू, जला हृदय में आग।
नित्य कर्म-पथ राही चलता, जागें उसके भाग।।

मग में फैले घने अँधेरे, नहीं सूझती राह।
पग-पग काँटे बिछे भले हों, मत करना परवाह।।
जो चाहोगे वही मिलेगा, त्यागो राग बिहाग।
मंजिल पाने हेतु पथिक तू, जला हृदय में आग।।

जब भी दुख की घिरें घटाएँ, खुशियों के पल खोज।
गिरे समय की जहाँ चंचला, उससे भर ले ओज।।
अनुकूलन का नित जीवन में, नहीं अलापो राग।
मंजिल पाने हेतु पथिक तू, जला हृदय में आग।।

शक्तिपुंज के स्रोत तुम्हीं हो, अपने को पहचान।
दृष्टि लक्ष्य रख खुद को मानो, अर्जुन का प्रतिमान।।
चाह अगर है मिले सफलता, बल-विवेक से जाग।
मंजिल पाने हेतु पथिक तू, जला हृदय में आग।।

*** चंद्र पाल सिंह 'चंद्र'

Sunday, 10 November 2024

सजग वहीं रहता इंसान - गीत

 

समाचार पढ़ भिज्ञ रहें जो, सजग वहीं रहता इंसान।
समाचार पढ़कर ही जनता, खबरों का लेती संज्ञान।।

सतयुग त्रेता द्वापर में भी, खबरों का था खूब प्रबन्ध।
नारद यह दायित्व निभाते, देवों का उनसे अनुबन्ध।।
समाचार सब दूत सुनाते, आकर राजा के दरबार,
पत्र-सूचना के माध्यम से, करे सूचना सदा प्रदान।
समाचार पढ़कर ही जनता, खबरों का लेती संज्ञान।।

समाचार पढ़कर ही जाने, फैल रहा कितना उन्माद।
संसद तक में उलझे नेता, करते रहते व्यर्थ विवाद।।
छान-बीन कर सम्पादक भी, खूब जमाते अपनी धाक,
पत्रकार कुछ खोजी होते, चौकस हो रहते गतिमान।
समाचार पढ़कर ही जनता, खबरों का लेती संज्ञान।।

ऊल-जलूल खबरों से बचना, झूठी खबरों की भरमार।
अपना उल्लू सीधा करते, करें सदा उनसे परिहार।।
सत्य जानना सब जनता को,संविधान देता अधिकार,
अफवाहों पर ध्यान न देना,कहते रहते सभी सुजान।
समाचार पढ़कर ही जनता, खबरों का लेती संज्ञान।।

*** लक्ष्मण लड़ीवाला 'रामानुज'

Sunday, 3 November 2024

दिवाली - मुक्तक द्वय

 

सागर-मंथन से हुआ, लक्ष्मी का अवतार,
पूजन माँ का सब करें, करें खूब मनुहार,
सबको धन की चाह है, क्या राजा क्या रंक -
धन-वैभव माँ दे रही, ख़ुशियों का आधार।।

करते हैं सब वंदना, देकर छप्पन भोग,
धन-वैभव सब माँगते, लक्ष्मी से संयोग ,
आशिष लक्ष्मी का मिले, बनता नर धनवान -
शुभ दिन कार्तिक माह में, बनता यह शुभ योग।।

*** मुरारि पचलंगिया

जीवन है संगीत - एक गीत

  शाश्वत गुंजित प्रणवाक्षर का, सतत् चल रहा गीत। उतर मौन में सुनो ध्यान से, जीवन है संगीत। चले समीरण सर-सर सर-सर, गाती है निर्भ्रांत। जल सरित...