Tuesday, 26 April 2016

पानी



यूँ तो ज्ञात सभी को है ये प्यास को हरता है पानी
बरबादी लाता है पर जिस रोज़ बिफरता है पानी


रखना नीची दृष्टि हमेशा यदि हो आज बुलन्दी पर
दीवारें ढह जाती हैं जब नींव में भरता है पानी


अब तक मैंने पीड़ाओं के दृश्य अनेकों देखे पर
दर्द कहूँ क्या अपने की जब आँख का मरता है पानी


सुनते आए हैं लोगों को पागल तक कर देता है
बनकर आँखों में जब ग़म का बोझ ठहरता है पानी


झील में कंकर फेंको तो जो लहरें जैसी बनती हैं
चोट को खाकर सीने पर दरअस्ल सिहरता है पानी


बात सहजता से करता हो उसको बुज़दिल मत समझो
कोई मुझको बतलाए कब आग से डरता है पानी


माना अपने जब्त पे मुझको नाज़ बहुत है पर 'अनमोल'
सब्र का दामन छूटा है जब सर से गुज़रता है पानी


••••••••••••••••••••••• Anmol Shukl Anmol

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