एक प्रेम प्रसंग - सार छंद

  जीवन नभ पर खिला चाँद वह, दिन के थकते आए। मन के सागर में डूबे फिर, भावों में उतराए। कैसे उसे निहारूँ जी भर, कैसे प्यार ...