देह सिर्फ हाड़-मांस है - एक रचना

  देह सिर्फ हाड़-मांस की आकृति नहीं यह उन तमाम स्पर्शों की स्मृति है जिन्हें समय ने हमारी त्वचा पर लिख दिया है कहते हैं देह के भीतर एक पूरा ...