Sunday, 11 August 2013

मुक्तक

2 comments:

  1. Wah....ye pehlu ka humein pata na tha...Dhanyavaad

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  2. दिब्येंदु दत्ता,
    धन्यवाद मित्र. यह भी अभी अपूर्ण है. छंद के बारे में जानकारियाँ अगाध हैं और किसी एक व्यक्ति के लिए सब-कुछ जानना संभव नहीं है.

    सादर
    सपन

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बचपन

जो किसी भी लालसा से मुक्त होगा सच कहें तो बस वही उन्मुक्त होगा हो नहीं ईर्ष्या न मन में द्वेष कोई हो न अभिलाषा-जनित आवेश कोई कुछ ...