Sunday, 30 August 2026

शुभ-मंगल

 

चंदन चर्चित गात सुवासित मंगल शुभम् प्रभात।
नेह सनेही वात अवतरित, शोभित धवल प्रपात।।

भोर निरंतर अन्वेषण में, उदित क्षितिज अभिप्रेत।
ओस रश्मि के आवर्तन में, मोती निर्मल श्वेत।।

स्वतः स्फुरित स्पंदन नीरव-सम, नियमित नृत्य निनाद।
श्रृंगारित सी शस्य स्यामला, स्वाति संग संवाद।।

अनगढ़ महलों के वातायन, शीतल शांत समीर।
खग बैठे चहके अकुलाये, सर सरिता के तीर।।

ऐसे में तू मद अलसायी, करती निलय प्रवेश।
रोम-रोम खिल जाये तन का, दिवस बने अवशेष।।

*** रमेश उपाध्याय

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