Sunday, 9 August 2026

लक्ष्य अपना है पाना - गीत

 

डर कर आँधी तूफ़ानों से, कहीं राह में रुक मत जाना।
जीवन के झंझावातों से, उबर लक्ष्य अपना है पाना॥

मौसम नित्य बदलते साथी, सुख-दुख भी हैं आते-जाते,
राह पकड़ जो एक चलें वो, अपनी मंजिल निश्चित पाते।
दृढ़ निश्चय के आगे गिरि भी, अपना उन्नत शीश झुकाते,
तप्त हवाओं से व्याकुल मरु, भू पर सुन्दर फूल खिलाते॥

मिले सफलता उसको जिसने, संघर्षों से हार न माना।
जीवन के झंझावातों से, उबर लक्ष्य अपना है पाना॥1॥

कहीं बाढ़ तूफ़ान कहीं है, अन्तस् उठा उफान कहीं है।
झंझावात हृदय के अन्दर, जीवन लहू-लुहान कहीं है॥
कहीं प्रलय सी बरखा बरसी, हृदय हिलोर उठान कहीं है।
तूफ़ानों में दीप जल रहा, जीवन का अवसान कहीं है॥

बाहर-भीतर की झंझा से, निकलेंगे मन में है ठाना।
जीवन के झंझावातों से, उबर लक्ष्य अपना है पाना॥2॥

विपदा में कुछ उजड़ गये घर, लेकिन साथी! हार न मानो।
मीत हृदय के बिछड़ गये यदि, इस दुनिया को अपना जानो॥
कर्म करो नवसृजन करो तुम, नये वितान यहाँ फिर तानो।
प्रकृति नटी के खेल अजब हैं, उसकी शक्ति सदा पहचानो॥

ईश्वर ने मानव-जीवन का, बुना अजब है ताना-बाना।
जीवन के झंझावातों से, उबर लक्ष्य अपना है पाना॥3॥

***कुन्तल श्रीवास्तव

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