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मन-मयूर मुस्काए - एक गीत
उमड़-घुमड़ घन छाए नभ में, बूंदन प्रीत-जगाए। पंख पसारे झूमे गाए, मन-मयूर मुस्काए। सौंधी-सौंधी महक चतुर्दिक, ऊर्वर करती अंचल। ...
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पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
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लंक विजय कर अवध में, लौटे श्री रघुवीर। दुष्ट दलन कर के हरी, जनमानस की पीर॥1॥ रघुवर के सम्मान में, सजा अयोध्या धाम। दीपोत्सव अभिव्यक्ति है,...
सुन्दर ज्ञानवर्धक जानकारी ,शुक्रिया सांझा करने के लिए Vishwajeet Sapan जी
ReplyDeleteआभार आपका मंजुल जी.
ReplyDeleteसादर नमन
बेहद सारगर्भित, पठनीय ब्लॉग | हार्दिक बधाई सपन सर
ReplyDeleteबेहद सारगर्भित, पठनीय ब्लॉग | हार्दिक बधाई सपन सर
ReplyDeleteसादर आभार आपका आदरणीय.
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