प्रेम ही प्राण है प्रेम ही श्वास है प्रेम पर ही टिका ये धरा ये गगन।
प्रेम ही शांति है प्रेम ही मोक्ष है प्रेम को ही हृदय कर रहा है नमन।
प्रेम से जीव है प्रेम से है जगत प्रेम से ईश है प्रेम से भक्ति है।
प्रेम ही भुक्ति है प्रेम ही मुक्ति है प्रेम कैवल्य है प्रेम ही शक्ति है।
प्रेम ही वंदना प्रेम ही अर्चना प्रेम अद्वैत है प्रेम ही है मिलन।
प्रेम ही शांति है प्रेम ही मोक्ष है प्रेम को ही हृदय कर रहा है नमन।
प्रेम ही प्यास है प्रेम ही तृप्ति है प्रेम ही भावना का अगम सिंधु है,
प्रेम से आचमन मन हमेशा करे प्रेम ही भाव का उच्चतम बिंदु है।
प्रेम के पान से प्रेम के मान से मिट सकेगी हृदय की अमिट यह तपन।
प्रेम ही शांति है प्रेम ही मोक्ष है प्रेम को ही हृदय कर रहा है नमन।
प्रेम ही धर्म है प्रेम ही कर्म है प्रेम की रागनी गा रहे ग्रंथ हैं
प्रेम ही सार है इस सकल सृष्टि का प्रेम से ही सजे भाव मय पंथ हैं।
बाँध सकता बताओ भला प्रेम को कामना से भरा यह अधूरा बदन।
प्रेम ही शांति है प्रेम ही मोक्ष है प्रेम को ही हृदय कर रहा है नमन।
*** सीमा गुप्ता 'असीम'




