Monday, 21 October 2013
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मन-मयूर मुस्काए - एक गीत
उमड़-घुमड़ घन छाए नभ में, बूंदन प्रीत-जगाए। पंख पसारे झूमे गाए, मन-मयूर मुस्काए। सौंधी-सौंधी महक चतुर्दिक, ऊर्वर करती अंचल। ...
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पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
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लंक विजय कर अवध में, लौटे श्री रघुवीर। दुष्ट दलन कर के हरी, जनमानस की पीर॥1॥ रघुवर के सम्मान में, सजा अयोध्या धाम। दीपोत्सव अभिव्यक्ति है,...
