Subscribe to:
Post Comments (Atom)
पर्व की महत्ता - दोहे
पर्व बढ़ाते हैं सदा, सामाजिक सद्भाव। पर्वों से रखना नहीं, मानव कभी दुराव।। एक सूत्र में बाँधकर, पर्व रखें परिवार। प्रेम और सौहार...
-
पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
-
सिर शोभित हेम किरीट गजानन मूषक वाहन प्रेम करे। उपवीत मनोहर कंध पड़ा अरु मोदक के कर थाल धरे। फल में प्रिय जामुन कैथ लगें उर पाटल फूल...

waah, Behad khubsurat Haiku. dhup ki vikaralata ke sath mauz bhee. dahee-achar, chuski bhee. bachapan yadd aa gaya chuski se. shandar lekhani
ReplyDeleteबहुत-बहुत आभार आपका आदरणीय राजकुमार धर द्विवेदी जी।
Delete