Sunday, 23 April 2017

दोहे जो मन को छू जाए



कभी-कभी कर लीजिए, मन में तनिक विचार।
व्यर्थ न जाए जिन्दगी, जीवन के दिन चार।।1।।


कभी-कभी खिलने लगें, पतझड़ में भी फूल।
होती है जब प्रभु कृपा, और समय अनूकल।2।।


कभी-कभी ये जिन्दगी, लगती है रंगीन।
और कभी लगने लगे, यही बहुत संगीन।।3।।


कभी-कभी होने लगे, दिल बेवजह उदास।
और कभी बिन बात ही, हो जाता मधुमास।।4।।


कभी-कभी लगने लगे, जीना ही दुश्वार।
कभी अपरिमित हो खुशी, रहे न पारावार।।5।।


चलता रहता है सदा, मन में झंझावात।
कभी-कभी मन डोलता, जैसे पीपल पात।।6।।


कभी-कभी हर बात पर, बन जाता है छंद।
और कभी पड़ने लगे, यही बुद्धि फिर मंद।।7।।


कभी-कभी देते प्रभू, सबको छप्पर फाड़।
फिर मोदी को भेजकर, लेते गड़ा उखाड़।।8।।


***हरिओम श्रीवास्तव***

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