Sunday, 7 June 2026

कहानी अग्नि की

 

'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि' अवनति की कहानी।
यदि सृजन का मंत्र है यह, तो प्रलय की भी निशानी।

यज्ञ में हो प्रज्ज्वलित यह, देवता का भाग लेती।
शीत से व्याकुल धरा को, उष्णता का दान देती।
दीप बनकर पथ दिखाती, विश्व को यह ज्योति दानी,
'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि'अवनति की कहानी।

जब तपोबल बन धधकती, लक्ष्य कब रहता प्रतीक्षित।
चढ़ शिखर पुरुषार्थ के हों, प्राप्य सारे ही अभीप्सित।
किन्तु अनियंत्रित हुई तो, भस्म कर देती जवानी,
'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि' अवनति की कहानी।

क्रोध बनकर यदि भड़कती, तोड़ देती नेह बन्धन।
नष्ट होती सभ्यताओं, की बनी है मूक क्रन्दन।
बोल हो संयम सधे यदि, प्रेम की गंगा बहानी।
'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि'अवनति की कहानी।

*** सीमा गुप्ता 'असीम'

कहानी अग्नि की

  'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि' अवनति की कहानी। यदि सृजन का मंत्र है यह, तो प्रलय की भी निशानी। यज्ञ में हो प्रज्ज्वलित ...