किसान
एक ऐसा मेहनती शख्स
जो बोता है उम्मीद सींचता है विश्वास
और काटता है संघर्ष
उसके हाथों की दरारों में
मौसमों का इतिहास लिखा होता है
उसके माथे पर चमकता पसीना
यूनिवर्सिटी की डिग्री से कम नहीं होता
वह हमेशा जागता रहता है
ओस की नमी और अंधेरे की चुप्पी के बीच
बादल उसके लिए कविता नहीं बल्कि
भाग्य का प्रश्न होते हैं और
बारिश उसके लिए रोमांस नहीं
रोटी का जुगाड़ होती है /है ना
कितनी अजीब बात जिसके हाथ
पूरे देश का पेट भरते हैं/अक्सर उसी
की थाली अधूरी रह जाती है
सूखा, बाढ़, कर्ज़ और बाज़ार
उसकी परीक्षा लेते हैं
फिर भी वह हार नहीं मानता
क्योंकि वह जानता है कि
जीवन का अर्थ संग्रह में नहीं
बेशक सृजन में है और किसान वह है
जो मिट्टी से सोना नहीं बनाता
बल्कि मिट्टी से जीवन बनाता है
जब भी किसी घर में
रोटी की खुशबू आती है
तब कहीं न कहीं
एक किसान का श्रम
मौन होकर मुस्कुराता है
पर एक सच तो यह भी है कि
धरती का सबसे उपेक्षित और निरीह
प्राणी किसान ही तो होता है
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***राजेश कुमार सिन्हा

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