आशा एक किरण छोटी सी, मन को ख़ुशियों से भर जाती।
चिर-सन्तप्त हृदय में नेहिल, अपनेपन का लेप लगाती।
भग्न मनोरथ के मरुथल में, सरिता बनकर बहती कल-कल।
निष्प्रभ नयनों के आँगन में, भरती है प्रकाश नित जल-जल।
साहस का अनुभाव लिए मन, कण्टक पथ में चरण बढ़ाती।
दुर्गम जीवन-पथ में निशिदिन, दिव्य विजयवर्तिका जलाती।
चिर-सन्तप्त हृदय में नेहिल....
जब-जब अन्तर की वीणा पर, स्वर नैराश्य निनादित होते।
हम स्वप्नों का आँचल छूकर, आशा की सरगम में खोते।
जाग्रति भर दे मनाकाश में, ऐसा मनहर गीत सुनाती।
आशा की लघु ज्योति मनों में, नित नूतन आभा बिखराती।
चिर-सन्तप्त हृदय में नेहिल....
निशि के घोर तिमिर में बनकर, अरुणोदय सी यह मुस्काए।
मृत-जीवन अभिलाषाओं में, नव-नव स्पन्दन भर-भर जाए।
अन्धकार आच्छादित मन में, बनी दामिनी चमक जगाती।
अवसादित मन के कोने से, क्षण में सारा तमस मिटाती।
चिर-सन्तप्त हृदय में नेहिल....
*** सीमा गुप्ता 'असीम'

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