प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।प्रेम बिना सब रिश्ते बन्धन, लगता जीवन खार।भाव-भूमि का मधुरिम अंकन, रचता नव आह्लाद।प्रेम-प्रकाश परावर्तित हो, देता दीप्ति प्रसाद।जड़-चेतन अवनी अम्बर का, प्रेम बना आधार।प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।पारावार प्रेम का शाश्वत, अनुपम और अगम्य।प्रेम सच्चिदानन्द रूप है, पावन और प्रणम्य।प्रेम-प्रभा से जगमग रहता, यह व्यापक संसार।प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।प्रेम-सुधा से तृप्त हृदय हो, मिटे सकल संताप।प्रेम जगाता है प्राणों में, करुणा का आलाप।दीप जलाए आत्म-प्रभा का, प्रेम करे उद्धार।प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।*** सीमा गुप्ता 'असीम'

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