Sunday, 11 October 2026

प्रेम बिना सब सूना - एक गीत

 

प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।
प्रेम बिना सब रिश्ते बन्धन, लगता जीवन खार।

भाव-भूमि का मधुरिम अंकन, रचता नव आह्लाद।
प्रेम-प्रकाश परावर्तित हो, देता दीप्ति प्रसाद।
जड़-चेतन अवनी अम्बर का, प्रेम बना आधार।
प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।

पारावार प्रेम का शाश्वत, अनुपम और अगम्य।
प्रेम सच्चिदानन्द रूप है, पावन और प्रणम्य।
प्रेम-प्रभा से जगमग रहता, यह व्यापक संसार।
प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।

प्रेम-सुधा से तृप्त हृदय हो, मिटे सकल संताप।
प्रेम जगाता है प्राणों में, करुणा का आलाप।
दीप जलाए आत्म-प्रभा का, प्रेम करे उद्धार।
प्रेम बिना सब सूना है जग, प्रेम तत्त्व है सार।

*** सीमा गुप्ता 'असीम'

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