Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ब्रह्म का स्वरूप माँ
सौम्य प्रेम,शील,क्षेम का विशुद्ध रूप माँ। जीव तत्व में विभक्त ब्रह्म का स्वरूप माँ। दण्ड दे दुलारती, भविष्य को सँवारती। कण्ठ से लगा कभी मम...
-
पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
-
जब उजड़ा फूलों का मेला। ओ पलाश! तू खिला अकेला।। शीतल मंद समीर चली तो , जल-थल क्या नभ भी बौराये , शाख़ों के श्रृंगों पर चंचल , कुसुम-...

waah, Behad khubsurat Haiku. dhup ki vikaralata ke sath mauz bhee. dahee-achar, chuski bhee. bachapan yadd aa gaya chuski se. shandar lekhani
ReplyDeleteबहुत-बहुत आभार आपका आदरणीय राजकुमार धर द्विवेदी जी।
Delete