पर्व बढ़ाते हैं सदा, सामाजिक सद्भाव।
पर्वों से रखना नहीं, मानव कभी दुराव।।
एक सूत्र में बाँधकर, पर्व रखें परिवार।
प्रेम और सौहार्द का, देते हैं उपहार।।
भारतीय त्योहार हैं, जीवन शैली अंग।
एक साथ जब बैठते, छेड़ें विविध प्रसंग।।
पर्व हमें देते सदा, खुशी और आनंद।
यही मानसिक शांति के, लिखते मधुमय छंद।।
संस्कृति और परंपरा, समझाते त्योहार।
नव उमंग उत्साह को, पर्व करें साकार।।
*** चंद्र पाल सिंह 'चंद्र'

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