पेड़ों से धरती की शोभा, कहते संत सुजान।
पेड़ लगाएँ पेड़ लगाएँ, मिलकर सब इंसान।।
इनसे लाभ बहुत हैं हमको, कहता है विज्ञान।
हरे पेड़ को नहीं काटना, हो भारी नुकसान।।
प्राण वायु मिलती है इनसे, जो जीवन आधार।
बात मान लो मेरी भाई, करो वृक्ष से प्यार।।
पशुओं को देते ये भोजन, ठंडी छाँव अपार।
खग-वृंदो के नीड़ यही हैं, सबका है उपकार।।
औषधि के भंंडार यही हैं, करते हमें निरोग।
भारत भू पर करते आए, हम इनका उपयोग।।
पुष्प फलों के हैं ये दाता, ईश्वर के वरदान।
कई तरह से पूरे करते, हम सबके अरमान।।
वेद हमें समझाते आए, देव इन्हें लो मान।
वृक्ष काटना बड़ा पाप है, बनें नहीं नादान।।
जनसंख्या अभिशाप बन रही, उजड़े हैं वन खूब।
जंगल को हम खूब बढ़ाएँ, बन करके महबूब।।
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*** मुरारि पचलंगिया

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