Sunday, 1 March 2026

ज़िंदगी का सच - मुक्तक

 

उसूलों की लड़ाई में, मुहब्बत हार जाती है।
फरेबी हो अगर सज़दे, इबादत हार जाती है।।
जिसे छलना फ़क़त आता, हिमायत वो करे सच की,
यही दस्तूर दुनिया का, शराफ़त हार जाती है।।

कहीं पर प्यार बिकता है, कहीं ईमान बिकता है।
खरीदोगे अगर तुम भी, जहाँ में ज्ञान बिकता है।।
शराफ़त की सभी बातें, किताबी फलसफ़ा यारों,
हक़ीक़त नोट की समझो, यहाँ इन्सान बिकता है।।

*** विजय मिश्र दानिश


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