Sunday, 2 July 2017

दुमदार दोहे


1.
उमड़ घुमड़ घिरने लगे, बदरा चारों ओर।
घनन घनन घन हो रहा, आसमान में शोर।।
मेघ पानी भर लाए।।
2.
मेघ मल्हारें गा रहे, कोयल का मधु गान।
हरित चूनरी में खिली, वसुधा की मुस्कान।।
झमाझम बारिश होती।।
3.
चोली चूनर चपल मन, सराबोर सब आज।
खोल दिए बरसात ने, यौवन के सब राज।।
काम ने वाण चढ़ाए।।
4.
सावन के झूले पड़े, शीतल मंद समीर।
मेघों की सौगात से, मिटी धरा की पीर।।
सभी के मन हर्षाए।।
5.
मेघों की बारात से, मन में उठे हिलोर।
वृंदगान करने लगे, दादुर मोर चकोर।।
हुआ मौसम सतरंगी।।


*****हरिओम श्रीवास्तव

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