Sunday, 30 July 2017

विधि/विधान पर दोहे


लागू अपने देश में, जो भी नियम विधान।
फर्ज सभी का है यही, इनका लें संज्ञान।।1।।


आँखों पर पट्टी बँधी, अंधा है कानून।
बिना गवाह सबूत के, कितने भी हों खून।।2।।


जिनको मिल पाती नहीं, रोटी भी दो जून।
उनको उलझाता सदा, ये अंधा कानून।।3।।


करते-करते पेशियाँ, बचे न भूँजी भाँग।
नियम और कानून भी, लगने लगते स्वाँग।।4।।


मिली सदा कानून से, एक यही बस सीख।
आशा रहती न्याय की, मिले सिर्फ तारीख।।5।।


*****हरिओम श्रीवास्तव

No comments:

Post a Comment

पर्व की महत्ता - दोहे

  पर्व बढ़ाते हैं सदा, सामाजिक सद्भाव। पर्वों से रखना नहीं, मानव कभी दुराव।। एक सूत्र में बाँधकर, पर्व रखें परिवार। प्रेम और सौहार...