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श्री कृष्ण जन्माष्टमी - एक गीत
निर्गुणी प्रगटे चतुर्भुज योगमाया पावनी है। दामिनी दमके सहस्रों यामिनी रस सावनी है। अवतरण सोलह कलाओं में सजाई सगुण काया। बाल छवि चंचल चपल च...
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पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
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श्वास के सोपान को चढ़ता गया मैं। आस औ विश्वास को गढ़ता गया मैं। जन्म से ले मृत्यु तक जीवन नहर है। ठाँव हैं प्रति पलों के क्षण भर ठहर है। ज्य...

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