Sunday, 29 July 2018

ताल पर दोहे



ताल शब्द तो एक है, इसके अर्थ अनेक।
कवि को श्रोता ताल दे, जागे जोश विवेक।


तबला ढोल सितार हो, या शहनाई नाल।
कानों में रस घोल दे, बजे संग इक ताल।


नर्तन में तो ताल की, बहुत बड़ी है बात।
काल-माप औ वज़न ही, देता शह या मात


दंगल में उतरे वही, जिसकी मोटी जान।
ताल ठोक गर्जन करे, सिंह भाँति बलवान


ताल तलैया पोखरा, भर दे जो बरसात।
दिन में होली ईद हो, मने दिवाली रात।

 
  *** सतीश मापतपुरी ***

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