Thursday, 2 April 2015

आ बैल मुझे मार

 
मूर्ख पत्नी।
कपटी यार।
आ बैल मुझे मार। 


चोरी चकारी।
लूट का व्यापार।
आ बैल मुझे मार। 


अंधा राजा।
बहरे कहार।
आ बैल मुझे मार। 


पराई नार।
दिल बेकरार।
आ बैल मुझे मार। 


कड़वे बोल।
बिना विचार।
आ बैल मुझे मार।


*** संजीव जैन:-

No comments:

Post a Comment

सौंदर्य - एक कवि का सच

  तुम शब्दों से परे हो फिर भी हर कवि तुम्हारा उपयोग करना चाहता है।  मानो, वह हवा को मुट्ठी में क़ैद कर लेने पर आमादा हो, मानो, आकाश को आँखों ...