Saturday, 1 June 2013

न सताया करो, न रुलाया करो (एक गीत)

पेड़ की छाँव में,
    मेरे ही गाँव में,
    न सताया करो, न रुलाया करो।

चाँदनी रात है,
आस की प्यास है,
घर भी मेरा कहीं, बस तेरे पास है,
आया-जाया करो और बुलाया करो
न सताया ....

सुबह होने लगी,
शब को मेंहदी लगी,
कू-कू करती ये कोयलिया गाने लगी,
तुम भी गाया करो और सुनाया करो,
न सताया ....

नींद में ख़्वाब है,
ख़्वाब में प्यार है,
ख़्वाब ही ख़्वाब में तेरा दीदार है,
तुम सुलाया करो और जगाया करो,
न सताया ....
विश्वजीत 'सपन' 
01.06.2013

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