Sunday, 15 February 2026

सबके पालन हार - एक गीत

 

सत्य सनातन नाम ईश का, सबके पालन हार।
सनद साधना डगमग है प्रभु, हाथ गहो पतवार।

जग के हो आराध्य देव तुम, चित्तवृत्ति अविनाश।
यही कल्पना युग मन्वंतर, अरि को करे निराश।
भूल रहें जो वेद ऋचाएँ, वंशज हैं हम आर्य,
अविनाशी को कहे सनातन, पंच तत्व में सार।

भेदभाव मतिसुप्त करें जो, क्षुद्र हृदय भयभीत।
धीर धरे साधक मन मंदिर, सुखकर ये संगीत।
रही सदी से मुखर चेतना, बढ़ा रहे संताप,
अंश अनागत समझ न पाये, विकल नीति आधार।

महिमा करें बखान पुण्यपथ, राम-रमा अनिकेत।
मर्यादा को लाँघा जिसने, दुष्ट हृदय समवेत।
क्षुद्र ग्रहों की भाँति मिटेंगे, कालनेमि सम दैत्य,
संस्कृति का आधार तुम्हीं हो, हे मेरे करतार।

*** डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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