घाट है मणिकर्णिका यह, रुद्र का वरदान है।
दिन-रात जलती है चिता, यहाँ महा-श्मशान है॥
मंत्र दें तारक यहाँ शिव, हर मृतक के कान में।
मोक्ष का खुल द्वार जाता, मरघट के वितान में।
मंत्र शिव का मृतक के हित, मोक्ष का वरदान है।
दिन-रात जलती है चिता, यहाँ महा-श्मशान है॥1॥
विविध रूपों में अघोरी, अर्द्ध रात्रि मसान में।
साधना शक्ति की करते, वाम मार्ग विधान में।
भूत-प्रेत-निशाचरों का, मसान एक छान है।
दिन-रात जलती है चिता, यहाँ महा-श्मशान है॥2॥
घाट पर गंगा के हरपल, आ रहे हैं शव नये।
शवदाह करने अग्नि ले, 'कर' चुका परिजन गये।
डोम राजा का यहाँ पर, नृप सदृश् सम्मान है।
दिन-रात जलती है चिता, यहाँ महा-श्मशान है॥3॥
*** कुन्तल श्रीवास्तव
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