Sunday, 10 August 2025

वर्तमान विश्व पर प्रासंगिक मुक्तक

 

गोला औ बारूद के, भरे पड़े भंडार,
देखो समझो साथियो, यही मुख्य व्यापार,
बच पाए दुनिया अगर, इनको कर दें नष्ट-
मिल बैठें सब लोग अब, करना यही विचार।।
हठधर्मी कुछ देश हैं, देना उनको दंड,
बहुत ज़रूरी हो गया, तोड़ें सकल घमंंड,
अहम् भाव वे पालते, बने विश्व में रोग-
करनी होगी अब हमें, अर्जित शक्ति प्रचंड।।

दुनिया डूबी जा रही, इसे बचाए कौन,
नेताओं से पूछ लो, रह जाते सब मौन,
कई देश बैठे हुए, कायरता को ओढ़-
सीधी करनी है हमें, चलती उलटी पौन।।
एटम बम गोदाम में, धमकी देते रोज़,
दोष और को दे रहे, करें न खुद की खोज,
क्यों विनाश पर है तुला, दुनिया का नेतृत्व-
दिन-दिन घटता जा रहा, सकल विश्व का ओज।।

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