Sunday, 13 June 2021

बदरा

 


उमड़-घुमड़ आये बदरा सखि,
हरषा अवनि संग जियरा सखि।
🌸
नृत्य करें टिप-टिप बुँदियाँ जब,
थिरक उठें बगियन कलियाँ सब,
बाजे रुनझुन स्वर पायलिया,
निरख-निरख हरषें अँखियाँ तब,
***
फूल-फूल पर नाचें भँवरे,
पात-पात झूमे हियरा सखि,
उमड़-घुमड़ आये बदरा सखि।
🌸
रस बरसा के मरुधर झर-झर,
भर देता जब ताल-सरोवर,
झरनों से नदियाँ उर जल भर,
बहतीं कल-कल छल-छल रव कर,
***
रिमझिम-रिमझिम बरस-बरस के,
बूँद-बूँद भर दे अँचरा सखि,
उमड़-घुमड़ आये बदरा सखि।
🌸
सबका तन-मन शीतल कर दे,
ताप सभी हर जिय सुख भर दे,
सुन कजरारे काले मेघा,
निर्मल उज्ज्वल कर अम्बर दे,
***
मन्द सुगंधित पवन झकोरे,
काले कुंतल दें बिखरा सखि,
उमड़-घुमड़ आये बदरा सखि।
🌸
कुन्तल श्रीवास्तव
डोंबीवलि, महाराष्ट्र

No comments:

Post a Comment

नेह भरा ईश्वर का प्यार

  सृष्टि रचयिता परमेश्वर ही, जीवन पथ करते उजियार । जीवन दर्शन जो भी समझे, कुदरत का माने उपकार ।। माँ बापू ही ईश हमारे, नित उठ उनको करे प्रणा...