Wednesday, 13 May 2020

सोचता रह गया




टूट कर भी लगा का लगा रह गया
दिल उसी आरज़ू से घिरा रह गया

पूजता ही रहा मैं जिसे इश्क़ में
एक बुत भर मेरा देवता रह गया

मैंने सोचा था वो ही करेगा पहल
वो भी मेरी तरह सोचता रह गया

कारगर तो वहाँ बस दुआएँ रहीं
मैं हथेली पे लेकर दवा रह गया

बाद बरसों मिले अजनबी की तरह
होते होते नया वाकया रह गया

मोड़ दर मोड़ गुज़री है यूँ ज़िन्दगी
छूटता हर जगह का पता रह गया

मन्ज़िलों तक पहुँच सिर्फ़ दो ही रहे
एक मैं रह गया इक ख़ुदा रह गया
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*** मदन प्रकाश ***

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